मुंबई के दलाल स्ट्रीट के पास एक लोकल 'चाय की टपरी' पर बैठने की कल्पना कीजिए। जहाँ आमतौर पर मल्टी-बैगर शेयरों की चर्चा होती थी, वहाँ आज घबराहट भरी फुसफुसाहट है। "यूएस-इजरायल-ईरान संघर्ष ने सब कुछ डुबो दिया है," एक निवेशक अपनी लाल पोर्टफोलियो स्क्रीन को देखते हुए बुदबुदाता है। "इक्विटी, सोना, चांदी—सब कुछ तेजी से गिर रहा है!"
वहीं बैठे एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर,
राजेश
काका ने मुझसे चिंता भरी नज़रों से पूछा, "क्या मुझे सब
कुछ बेच देना चाहिए और हालात शांत होने का इंतज़ार करना चाहिए?"
एक वित्तीय विशेषज्ञ के रूप में,
मुझे
सुधार (Correction) के दौरान अक्सर यह सवाल सुनने को मिलता है। डरना स्वाभाविक है,
लेकिन
उस सुबह मैंने राजेश काका के साथ एक राज साझा किया: "मार्केट
की 'टाइमिंग' करना तो नामुमकिन है, लेकिन
बड़ी गिरावट का फायदा उठाना ही दौलत बनाने की असली नींव है।"
बाजार का सबसे निचला स्तर (Bottom)
ढूंढना
पेशेवरों के लिए भी असंभव है। इसलिए, यह सोचने के बजाय कि बाजार कब गिरना
बंद होगा, अपने वित्तीय लक्ष्यों पर ध्यान दें। क्या आप रिटायरमेंट, बच्चों
की पढ़ाई या घर के लिए निवेश कर रहे हैं? आपका निवेश इन लक्ष्यों के हिसाब से
होना चाहिए, न कि हेडलाइंस के हिसाब से।
आइए हम अपने भारतीय बाजार—सेंसेक्स और
निफ्टी—के इतिहास को देखें:
1. 2008 का वैश्विक
संकट: जब दुनिया भर का बैंकिंग सिस्टम हिल
गया था, तब सेंसेक्स 21,000 के स्तर से गिरकर 9,000 के
नीचे (लगभग 60% की गिरावट) आ गया था। लोगों को लगा कि सब खत्म हो गया। लेकिन
जिन्होंने अपना अनुशासन बनाए रखा और अपनी SIP जारी रखी,
उन्होंने
देखा कि बाजार न सिर्फ संभला, बल्कि कुछ ही वर्षों में अपने पुराने
स्तर से दोगुना हो गया।
2. 2020 का कोविड क्रैश: हाल ही में, जब महामारी के डर से निफ्टी सिर्फ एक
महीने में 35% गिरकर 7,500 के करीब आ गया था। लेकिन वही गिरावट
पिछले एक दशक का सबसे बड़ा अवसर साबित हुई, और बाजार ने
रिकॉर्ड तोड़ रिकवरी की।
इतिहास गवाह है: भारतीय बाजार ने हमेशा
उन लोगों को इनाम दिया है जिन्होंने 'संकट' को 'डर'
के
बजाय 'अवसर' के रूप में देखा।
अब आपको क्या
करना चाहिए?
सबसे जरूरी है एसेट
एलोकेशन (Asset Allocation)। इसका मतलब है—अपने सारे अंडे एक ही
टोकरी में न रखें। आपके पास इक्विटी, डेब्ट और सोने का सही मिश्रण होना
चाहिए। जब बाजार गिरता है, तो यह 'सेल'
(Sale) में खरीदारी करने जैसा है। गिरावट में निवेश करने से आपकी औसत खरीद
लागत कम हो जाती है, जो भविष्य में शानदार रिटर्न देती है।
आज की भू-राजनीतिक उथल-पुथल से डरें
नहीं। अपनी SIP जारी रखें और अपने लक्ष्यों पर टिके रहें। याद रखें, तूफान
के दौरान दिखाया गया धैर्य ही सुनहरी धूप में समृद्धि लेकर आता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। कृपया योजना से
जुड़े सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें। यह सामग्री केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए
है और इसे निवेश सलाह या सिफ़ारिश नहीं माना जाना चाहिए। कृपया
उचित मार्गदर्शन के लिए किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर या रजिस्टर्ड
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह लें।
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